उत्तर प्रदेशबस्तीलखनऊ

बस्ती मंडल मुख्यालय का जिला प्रदेश का पहला ऐसा जिला है, जहां एडीएम का केवल एक ही पद है।

बस्ती उत्तर प्रदेश के 18 मंडलों में से एक का मुख्यालय है। सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था में कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, आगरा, वाराणसी जैसे बड़े मंडल मुख्यालय वाले जिलों में 4 से 8 तक एडीएम के पद होते हैं - जैसे ADM प्रशासन, ADM वित्त एवं राजस्व, ADM नगर, ADM भू-अर्जन, ADM प्रोटोकॉल, ADM न्यायिक आदि। यहाँ तक कि हाल में बने विंध्याचल (मिर्जापुर) और देवीपाटन (गोंडा) मंडल मुख्यालयों में भी 2-2 एडीएम के पद सृजित हैं।

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती जिले में प्रशासनिक ढांचे को लेकर एक चौंकाने वाली चर्चा तेज है। सवाल यह है कि बस्ती जैसे मंडल मुख्यालय में आखिर एडीएम का केवल एक ही पद क्यों है, और क्यों इस पद पर तैनात अफसर लंबे समय तक जमे रहना चाहते हैं?

  • एडीएम के पास मलाईदार विभागों का प्रभार होने और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप।
  • स्थानीय निकाय और बाढ़ विभाग में फर्जी भुगतान के दबाव और करोड़ों के वारे-न्यारे होने का दावा।

बस्ती जिले में प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती और उनके कामकाज को लेकर एक सनसनीखेज रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें यह सवाल उठाया गया है कि आखिर क्यों कोई भी एडीएम बस्ती जिले से जल्दी जाना नहीं चाहता है।

​प्रदेश के अन्य मंडल मुख्यालयों—जैसे कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज और आगरा—के जिलों में चार से आठ तक एडीएम तैनात होते हैं, और हाल ही में बनाए गए विंध्याचल व देवीपाटन मंडलों के मुख्यालयों में भी दो-दो एडीएम की तैनाती है। इसके विपरीत, बस्ती एकमात्र ऐसा मंडल मुख्यालय है जहाँ केवल एक ही एडीएम (एडीएम एफआर) का पद है।

सामने आई रिपोर्ट में इस विसंगति को भ्रष्टाचार की संभावित वजह के तौर पर देखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार –

  • मलाईदार विभागों का केंद्रीकरण: बस्ती में एक ही एडीएम होने से स्थानीय निकाय, बाढ़ खंड, खनन, मंडी समिति, आबकारी, राजस्व वसूली जैसे सभी महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार उसी एक अधिकारी के पास रहता है। अन्य जिलों में ये प्रभार 3-4 एडीएम में बंटे होते हैं।
  • बजट का आकार: इन विभागों का सालाना बजट करोड़ों रुपये का है। बाढ़ विभाग में बोल्डर, बोरियां और कटान रोधी कार्यों के नाम पर हर साल बड़े बजट आते हैं।
  • फर्जी भुगतान और दबाव के आरोप: रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि बाढ़ कार्यों में बिना काम के ही फर्जी मस्टरोल और बोल्डर गिराने के बिल लगाकर भुगतान कराने के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर दबाव बनाया जाता है। इसमें कई पूर्व और वर्तमान अधिकारियों के नामों का उल्लेख कर उदाहरण दिए गए हैं।

मलाईदार विभागों का प्रभार और अकूत कमाई

​रिपोर्ट के अनुसार, चूंकि बस्ती में एडीएम के पास ही अधिकांश महत्वपूर्ण और मलाईदार विभागों का प्रभार होता है, इसलिए यहाँ भ्रष्टाचार और वित्तीय हिस्सेदारी की गुंजाइश अन्य जिलों की तुलना में बहुत अधिक है। स्थानीय निकाय, बाढ़ विभाग, खनन और मंडी समिति जैसे महकमों का सालाना बजट और उनमें होने वाला कथित खेल करोड़ों रुपये का बताया गया है।

दबाव और भुगतान के मामले

​पूर्व और तत्कालीन अधिकारियों ने किस प्रकार फर्जी भुगतानों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव बनाए जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, बाढ़ विभाग के कार्यों और बोल्डर गिराए जाने के नाम पर भारी वित्तीय अनियमित्ताओं और फर्जी बिलों के भुगतान का दबाव डालने के आरोप लगाए गए हैं।

कार्रवाई की मांग

​इन तमाम गंभीर शिकायतों और साक्ष्यों के बावजूद धरातल पर प्रभावी कार्रवाई न होने पर सवाल उठाए गए हैं। आम जनता और मीडिया लगातार भ्रष्ट आचरण में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं, तथा इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराकर मुख्यमंत्री (CM) से सख्त कदम उठाने की मांग की गई है।

इतनी गंभीर शिकायतों और मीडिया रिपोर्टों के बावजूद अभी तक कोई प्रभावी जांच क्यों नहीं हुई। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि –

• बस्ती में भी अन्य मंडल मुख्यालयों की तरह एडीएम के अतिरिक्त पद सृजित किए जाएं, ताकि कार्य का विकेंद्रीकरण हो। • बाढ़ विभाग, खनन और मंडी समिति के पिछले 5 वर्षों के कार्यों की उच्चस्तरीय ऑडिट कराई जाए। • मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर से पूरे प्रकरण की जांच कराकर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शासन बस्ती में ADM (Judicial), ADM (Administration) और ADM (Civil Supply) जैसे पद सृजित करता है, तो न सिर्फ भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होगी, बल्कि जनता के काम भी तेजी से होंगे।

मुख्य बातें

  • एकल पद की व्यवस्था: बस्ती मंडल मुख्यालय का जिला प्रदेश का पहला ऐसा जिला है, जहां प्रशासनिक व्यवस्था के तहत केवल एक ही एडीएम का पद है, जबकि अन्य मंडलों के मुख्यालयों में दो या उससे अधिक एडीएम तैनात होते हैं।
  • मलाईदार विभागों का केंद्रीकरण: एडीएम एफआर के पास स्थानीय निकाय, डूडा, खनन, बाढ़, आपदा, मंडी समिति और कलेक्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण और वित्तीय रूप से मजबूत विभागों का प्रभार रहता है।
  • वित्तीय लेन-देन और भ्रष्टाचार के आरोप: लेख में विभिन्न विभागों (विशेषकर स्थानीय निकाय और बाढ़ विभाग) में फर्जी भुगतान के दबाव और करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे होने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
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